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पीलिया ‌( जोन्डिस) रोग का लक्षण, कारण आयुर्वेदिक उपचार

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पीलिया रोग क्या है? पीलिया (जोंडिस) रोग एक प्रकार का रोग है जो कि शरीर के लिवर में होता है। इस रोग में बिलीरुबिन नामक एक तत्व की मात्रा बढ़ जाती है जो जब ज्यादा हो जाती है तो आपकी त्वचा और आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ जाता है। पीलिया रोग के कारण वायरल संक्रमण: अधिकतर मामलों में, पीलिया वायरल संक्रमण से होता है जैसे कि हेपेटाइटिस ए और बी। बैक्टीरियल संक्रमण: बैक्टीरियल संक्रमण जैसे कि स्पाइरोकीट (जो लाइम रोग के कारण भी होता है) और टाइफाइड भी पीलिया के कारण बन सकते हैं। अन्य विषाक्त पदार्थ: शराब या दवाओं के अधिक सेवन, बाइल पदार्थों और अन्य विषाक्त पदार्थों के संभव उपयोग के कारण भी पीलिया हो सकता है। लिवर संबंधी बीमारियां: लिवर संबंधी बीमारियों जैसे कि सिरोसिस और लिवर कैंसर भी पीलिया का कारण बन सकते हैं। पीलिया (जोंडिस) रोग के लक्षण पीलिया रोग के लक्षण होते हैं जैसे थकान, बुखार, उल्टी, पेट दर्द, जी मचलाना, पेट फूलना और पीले रंग के मल, भूख नहीं लगना, खाना हजम नहीं होना, पेट में दर्द, त्वचा और आंखों का पीला हो जाना और बढ़ते वजन में कमी। पीलिया (जोंडिस) रोग के आयु...

आंखों के रोगों के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार

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आंख क्या है? आंख एक महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रिय है जो हमारे शरीर के अंदर स्थित होता है। यह एक अत्यंत संवेदनशील अंग होता है जो हमें दुनिया के बाहर के वस्तुओं, रंगों, आकारों और संरचनाओं को देखने में मदद करता है। यह हमारी परिसंचार व्यवस्था और एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आंख एक विशेष प्रकार का अंग होता है जो उत्तेजित होने पर संक्रमण को रोकने के लिए एक तरफ से एक दरवाज़ा और एक तरफ से एक उत्सुकता ग्रंथि के रूप में काम करता है। इसके अलावा, यह उत्तेजित होने पर न्यूरोन्स द्वारा जीवाणु ग्रंथि में आवेदन की प्रेरणा करता है जो फिर शरीर के अन्य भागों में संक्रमण रोकने के लिए न्यूरोनल संचार को बढ़ाती है। आंखों के रोगों का लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार आंखों के रोग का लक्षण आंख में दर्द की समस्या रहना, रात के समय कम दिखाई देना ,आंखों में चुभन या पानी आना ,साफ और स्पष्ट न दिखना,आंखों का नज़र कम, आंखों की गंभीर बीमारियों की लक्षण हैं, इसे हम नजर अंदाज नहीं करना जाना चाहिए। आंखों के रोग का कारण अधिक अंधकार में रहना अधिक धूल-मिट्टी वाली जगहों में रहना खराब खान-पान और ...

उल्टी , दस्त या अतिसार और बच्चों को दस्त होने पर आयुर्वेदिक उपचार

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उल्टी होने पर, उल्टी:- जो भी खाया हुआ भोजन किसी कारण  से पेट की भोजन को  ज़बरदस्ती मुंह  के द्वारा से बाहर निकले ,उसे उल्टी कहते हैं। बार-बार उल्टी होने पर  जल्द से जल्द उपचार नहीं किया तो मनुष्य के लिए खतारनाक साबित हो सकता हैं।   उल्टी के आयुर्वेद उपचार,  इनमें से किसी एक  उपाय का प्रयोग करके  उल्टी होने पर   उपचार कर सकते हैं। 👉 नींबू का शर्बत पीने से।  👉सोडे का पानी लेने से   👉तुलसी के पत्ते  2से 10 मि .ली. रस में उतने ही मिश्री या शहद मिलाकर पीने से लाभ होता हैं। 👉 प्याज़ का रस 2 से 10 मि.ली.पिलाने से उल्टी में लाभ  होता है। 👉 धनियापत्ती या अनार का रस थोड़ी थोड़ी देर पीने से उल्टी बंद होने लगती हैं। दस्त होने पर  दस्त :- दस्त या डायरिया होने पर  बार-बार मल का जाना । मल बहुत पतले होते हैं अथवा दोनों ही स्थितियां होती हैं।  अतिसार, जिनमें मल कम जल का भाग अधिक होता है, थोड़े-थोड़े समय के अंतर से आते रहते हैं। दस्त के होने पर निम्न लक्षण को देखने को मिलता है।  दस्त के लक्षण:- पानी जैस...