उल्टी , दस्त या अतिसार और बच्चों को दस्त होने पर आयुर्वेदिक उपचार
उल्टी होने पर, उल्टी:- जो भी खाया हुआ भोजन किसी कारण से पेट की भोजन को ज़बरदस्ती मुंह के द्वारा से बाहर निकले ,उसे उल्टी कहते हैं। बार-बार उल्टी होने पर जल्द से जल्द उपचार नहीं किया तो मनुष्य के लिए खतारनाक साबित हो सकता हैं। उल्टी के आयुर्वेद उपचार, इनमें से किसी एक उपाय का प्रयोग करके उल्टी होने पर उपचार कर सकते हैं। 👉 नींबू का शर्बत पीने से। 👉सोडे का पानी लेने से 👉तुलसी के पत्ते 2से 10 मि .ली. रस में उतने ही मिश्री या शहद मिलाकर पीने से लाभ होता हैं। 👉 प्याज़ का रस 2 से 10 मि.ली.पिलाने से उल्टी में लाभ होता है। 👉 धनियापत्ती या अनार का रस थोड़ी थोड़ी देर पीने से उल्टी बंद होने लगती हैं। दस्त होने पर दस्त :- दस्त या डायरिया होने पर बार-बार मल का जाना । मल बहुत पतले होते हैं अथवा दोनों ही स्थितियां होती हैं। अतिसार, जिनमें मल कम जल का भाग अधिक होता है, थोड़े-थोड़े समय के अंतर से आते रहते हैं। दस्त के होने पर निम्न लक्षण को देखने को मिलता है। दस्त के लक्षण:- पानी जैस...